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प्रेमचंद — ईमानदारी (संक्षिप्त)

गाँव के मेल में लड़के ने गलती से अधिक मिठाई उठा ली। रात को उसने माँ से कहा, "मैं कल विक्रेता के पास जाकर पैसे दूँगा।" ईमानदारी छोटे कामों में भी दिखती है।